वंदे मातरम्

''न मैं कवी हूँ न कवितायें , मुझे अब रास आती हैं , मैं इनसे दूर जाता हूँ , ये मेरे पास आती हैं, हज़ारों चाहने वाले, खड़े हैं इनकी राहों में, मगर कुछ ख़ास मुझमें है , ये मेरे साथ आती हैं।''

101 Posts

251 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 14028 postid : 1103811

धार्मिक उग्रवाद से व्यथित देश

  • SocialTwist Tell-a-Friend

धार्मिक कट्टरता भारत में अप्रत्याशित रूप से बढ़ रही है। भारतीय युवाओं में धार्मिक सनक की प्रवित्ति अधिक ही बढ़ती जा रही है। हर कोई अपने धर्म के लिए किसी भी तरह का अधर्म करने के लिए तैयार है। सोशल नेटवर्किंग साइट्स चाहे वो फेसबुक हो,ट्विटर हो या ब्लॉग हो हर जगह कुछ तथाकथित धर्म के ठेकेदार लोग भारत को हिन्दू और मुसलमान ख़ेमे में बाँट रहे हैं।हद तो तब हो जाती है जब आप फेसबुक चला रहे हों और अपने किसी अख़बार का पेज लाइक किया हुआ है और दुर्भाग्य वश उस पर हुए कमेंट्स पर नज़र चली जाये तो ऐसा लगता है कि पेज कारगिल युद्ध में तब्दील हो गया है और हिंदुस्तान- पाकिस्तान एक-दुसरे के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं। हिन्दू अतिवादी कहते हैं कि मुसलमान कौम के गद्दार हैं तो मुसलमान कहते हैं हमारे पूर्वजों ने तुम्हारे पूर्वजों को सदियों गुलाम बना के रखा, तुम्हारी माँ-बहिन, बेटियों को अपने हरम में रखा। ये हमीं हैं जिनसे तुम्हारी नस्लें महफूज़ हैं, जिस दिन चाहेंगे तुम सबको काट कर रख देंगे। ये कमेंट्स किसी पाकिस्तानी के नहीं होते ये भारतीय मुसलमानों के कमेंट्स हैं। कभी भारत का कौमी एकता के लिए मिसाल दिया जाता था पर आज तो भारतीयता भी आहत है।
आप इंटरनेट पे ज़रा भी सक्रिय हैं तो आपको ये सारी गतिविधियाँ आसानी से देखने को मिल सकती हैं। एकमात्र यही कारण है कि ओवेसी जैसे नेता रातों-रात इस्लाम के हीरो बन जा रहे हैं। ऐसे सारे नेताओं का बस एक मक़सद है कि नफ़रत बोओ और राज करो।
पूरे भारत में इस्लामिक कट्टरता अपनी जड़ें फैला रही हैं। मुस्लिम युवाओं में विद्रोह के स्वर फूंकें जा रहे हैं। कई आतंकी संगठनों ने अपनी पहुँच इतनी मज़बूत कर ली है कि हमारे सामने ही हमारा देश टुकड़ों में विभाजित नज़र आ रहा है।
भारत के लगभग-लगभग हर राज्य में मुस्लिम युवा बड़ी संख्या में इस्लामिक स्टेट की तरफ पलायन कर रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले यूनाइटेड अरब अमीरात ने कुछ भारतियों को इस्लामिक स्टेट से संपर्क की वजह से वापस भेजा था। ये हमारे तंत्र की विफलता है कि हम देश में होने वाली ऐसी घटनाओं पर नज़र नहीं रख पाते हैं।
हाल में ही दिल्ली के एक रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर की बेटी मीडिया की सुर्खियां बनी थी। उसे भी इस्लामिक स्टेट ज्वाइन करना था। मतलब साफ है कि सिर्फ कम पढ़े लोग ही नहीं बल्कि भारत के सर्वोच्च शिक्षण संस्थानों में भी पढ़ने वाले मुस्लिम युवा आई.एस.आई.एस की चपेट में हैं। केरल,गोआ,आंध्र प्रदेश( सबसे ज्यादा हैदराबाद ) और अब उत्तर भारत भी धार्मिक अतिवादिता की चपेट में है।
ऐसा क्या है जिससे भारतीय युवा इतनी बड़ी संख्या में पलायन कर रहे हैं आतंक के काबा की ओर? ऐसा धर्म किस काम का जिसका अस्तित्व लाशों की ढेर पर बना हो। आज पूरा विश्व आतंक की लपटों में जल रहा है। बड़ी संख्या में मौत ताण्डव कर रही है। पर पूरा विश्व समुदाय मौन है।
इस्लामिक स्टेट कितनी क्रूर संस्था है यह कहने की आवश्यकता नहीं है। सैकड़ों की संख्या लोग काटे-मारे जा रहे हैं। देश के नागरिक देश छोड़ के भाग रहे हैं। नरक से बुरी परिस्थितियां हो गयी हैं। एक यमराज से पूरी दुनिया त्रस्त है वहां तो हर चौराहे पे एक यमराज हैं फिर भी पता नहीं क्या दिख रहा है वहां मुस्लिम युवकों को वहां पर जो मरने-मारने के लिए इस्लामिक स्टेट की ओर बड़ी संख्या में पलायन कर रहे हैं। कभी-कभी जब इस्लामिक स्टेट के आतंकी अपने अमानवीय कृत्यों की वीडियो अपलोड करते हैं तो कलेजा कांप जाता है। खून की नदियां बहाते हैं, गले काटते हैं,गोली मरते हैं…इतने वीभत्स कृत्य करने वाले लोग क्या कभी अल्लाह या रसूल के प्रिय हो सकते हैं क्या? ये पूरी दुनिया के लिए संकट बने हुए हैं और इन्हें लगता है कि धर्म संकट में हैं।
किसी भी धर्म का उत्थान हिंसा से असंभव है। जो धर्म सबसे अधिक उदार होगा,समरसता पूर्ण होगा और मानवीय होगा वही अस्तित्व में रहेगा। किन्तु कोई भी इस तथ्य को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।
जब धर्म राष्ट्र भक्ति में बाधक बने तो उसे त्याग देना चाहिए। क्योंकि जो व्यक्ति अपने मातृभूमि से गद्दारी कर सकता है वह किसी भी धर्म या संस्कृति का पोषक नहीं हो सकता है।
आज पूरे विश्व में आगे बढ़ने की होड़ मची है। कोई मंगल पर तो कोई प्लूटो पर जाने की तैयारी कर रहा है पर एशिया धर्म संरक्षण में कट-मर रहा है। ऐसे धर्म की प्रासंगिकता क्या है जिसमें मानवता लेश मात्र भी न बची हो?
सनातन धर्म की एक प्रचलित सूक्ति है-
“हिंसायाम् दूरते यस्य सः सनातनः।”
आर्थात मन से,वचन से और कर्म से जो हिंसा से दूर है वही सनातन है। जो कर्म प्राणी मात्र को कष्ट दे वह हिंसा है। जो हिंसक है वह सनातनी नहीं है…मानव भी नहीं है। यह कथन सभी धर्मीं के अनुयायियों को समझना चाहिए।
क्या जो लोग ऐसे धार्मिक उन्माद पैदा करते हैं जिससे देश में आतंरिक कलह पैदा होता है उन्हें धार्मिक कहा जा सकता है? ये सत्ता लोलुप लोग हैं किसी भी धर्म से इनका कोई मतलब नहीं है।
न ये हिन्दू हैं न मुसलमान हैं कोई और ही धर्म है इनका। शैतान इन्हें ही कहते हैं शायद।
कुछ मुसलमान इस देश की सरकार से असंतुष्ट लोग पाकिस्तान के बरगलाने की वजह से वतन से ग़द्दारी कर पूरे इस्लाम को कठघरे में खड़ा करते हैं। पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाने वाले लोग, देश से ग़द्दारी करने वाले लोग न तो मुसलमान हैं न हिंदुस्तानी।
गद्दारों की कोई कौम नहीं होती है। इस देश को धर्मों में बाँटने वाले लोग ये क्यों भूल जाते हैं जब कलाम साहब विदा लेते हैं वतन से तो पूरा देश रोता है। जब क़साब को,अफज़ल गुरु को और याक़ूब को फाँसी होती है तो देश में लड्डू बंटता है।
कोई भी इंसान वतन से ग़द्दारी करके महान नहीं बनता काफ़िर जरूर बन जाता है। ऐसी हरकतों से न ईश्वर खुश हो सकते हैं न ख़ुदा।
भारतीय दर्शन राष्ट्ररक्षा को ही धर्म मानता है। मंदिरों में कोई भी यज्ञ,हवन की पूर्णाहुति तब तक नहीं होती जब तक “भारत माता की जय” नहीं बोला जाता। देशभक्ति संसार के सभी धर्मों से श्रेष्ठ है। धर्म द्वितीयक हो तथा राष्ट्र प्राथमिक तो समझिये आप ईश्वर के सच्चे उपासक हैं।
आप हिन्दू, मुसलमान या इसाई हों पर भारतीय होना न भूलें। देश से वफ़ादारी करने वालों पर हर मज़हब के खुद को फ़ख़्र होता है।आइये आप और हम मिलकर देश को मज़बूत बनायें,प्रगतिशील बनायें..विकसित बनायें। हम हिंदुस्तानी हैं। विश्व बंधुत्व का पाठ हम दुनिया को पढ़ाते हैं यदि हम सांप्रदायिक दंगे करेंगे, धार्मिक उन्मादी बनेंगे तो हमारे देश की साझा संस्कृति को कितना ठेस पहुंचेगा।इक़बाल साहब ने बहुत सही बात कही है-
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना,
हिंदी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ
हमारा।।
हम सब एक हैं। एक ही माँ के बेटे हैं। क्या हुआ हमारे पूजा की पद्धतियाँ अलग हैं…हमारा देश तो एक है..हमारी माँ तो एक है।
संसार की प्राचीनतम् सभ्यता जब बर्बरता का ताण्डव देखेगी तो क्या उसका ह्रदय नहीं फटेगा?
आओ इस महान संस्कृति को क्षत्-विक्षत् होने से रोकें। इस देश की आत्मा को व्यथित न होने दें…आओ “वसुधैव-कुटुम्बकम्” की भावना को विकसित करें..हम सब मिलकर रहें…अपने राष्ट्र को एक आदर्श राष्ट्र बनायें जिससे पूरी दुनिया बोल पड़े-
सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्ताँ तुम्हारा..जाने क्यों लगता है कि ये एक ऐसा ख्वाब है जो ख्वाब ही रहेगा…क्योंकि जिस तरह का उन्माद आज-कल फ़ैल रहा है उसे देखकर अपने भारत को अखण्ड राष्ट्र कहने से डर लगता है…डर लगता है कि कहीं हम आपस में काट-मर कर एक और महाभारत न कर बैठें…



Tags:       

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

3 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
October 4, 2015

प्रिय अभिषेक बहुत अच्छा लेख परन्तु किया क्या जाये धार्मिक उन्माद पूरे विश्व की तकदीर बन गया हैं | आप हिन्दू, मुसलमान या इसाई हों पर भारतीय होना न भूलें। देश से वफ़ादारी करने वालों पर हर मज़हब के खुद को फ़ख़्र होता है।आइये आप और हम मिलकर देश को मज़बूत बनायें,प्रगतिशील बनायें..विकसित बनायें। हम हिंदुस्तानी हैं। विश्व बंधुत्व का पाठ हम दुनिया को पढ़ाते हैं बहुत अच्छे विचार परन्तु पाकिस्तान के रहते क्या हम बच सकते हैं

jlsingh के द्वारा
October 3, 2015

…डर लगता है कि कहीं हम आपस में काट-मर कर एक और महाभारत न कर बैठें…इसी का डर है


topic of the week



latest from jagran