वंदे मातरम्

''न मैं कवी हूँ न कवितायें , मुझे अब रास आती हैं , मैं इनसे दूर जाता हूँ , ये मेरे पास आती हैं, हज़ारों चाहने वाले, खड़े हैं इनकी राहों में, मगर कुछ ख़ास मुझमें है , ये मेरे साथ आती हैं।''

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प्रगतिशील भारत

Posted On: 26 Nov, 2014 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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कितने गर्व की अनुभूति होती है जब विदेशी मीडिया हमारे देश के बारे में बात करती है, उत्साह और बढ़ जाता है जब बातें सकारात्मक हों। एक देश जो किसी न किसी क्षेत्र में हमारा प्रतिद्वंद्वी है वो सारे द्वंद्व भूलकर जब मुक्त कंठ से हमारे विदेश नीतियों की, प्रगति की, शिक्षा की प्रशंसा करे तो निःसंदेह गौरवान्वित होना स्वभाविक है। संयोग से एक बार फिर भारत हर क्षेत्र में प्रगति कर रहा है और अब विकास हर जगह दिखाई दे रहा है। बात चाहे देश में बुलेट ट्रेन के दौड़ने की हो या मंगलयान के मंगल ग्रह पर पहुँचने की हो भारतीय हर जगह नाम कर रहे हैं।
भारतीय वैज्ञानिकों ने हर बार ये साबित किया है कि सीमित संसाधन कभी विकास कार्यों में रोड़ा नहीं बनते बल्कि नए संसाधनों के मार्ग प्रशस्त करते हैं।
इतिहास याद करें तो जो भी भारत आया भारतीयता और भारतीय संस्कृति को मिटाने ही आया, जो यहाँ आया लूट कर ही गया, पर इतना लुटने के बाद भी भारत आज भी समृद्ध है, सारे लुटेरों के बराबर खड़ा है बल्कि कहीं न कहीं उनसे बेहतर और मज़बूत स्थिति में।
आज तो देश के कपूतों ने देश की थोड़ी बहुत दुर्गति मचाई है वरना कितने प्रगति का पर्याय होता भारत।
खैर इतिहास साक्षी है विश्व का कोई भी देश इतने झंझावात झेलने के बाद अस्तित्व में नहीं रह सका पर भारत हर दिन बेहतर हो रहा है।
हमारे प्रतिद्वंद्वी राष्ट्रों को भारत का बढ़ता वर्चस्व खल रहा है तभी तो आये दिन अपने मन की भड़ास निकालते रहते हैं कभी घुसपैठ करके तो कभी बमबारी करके पर हर बार हमारी सेना इनके दांत खट्टे करती है, हर बार पूरी दुनिया में अपनी थू-थू कराते हैं।
कल तक जिस भारत को विश्व सँपेरों का देश कहता था जिन्हें भारत असभ्य और बर्बर लोगों का देश लगता था उन्हें आज फिर से भारत विश्व गुरु लगने लगा है। भारत आज सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में दुनिया में सबसे आगे है। चिकित्सा के क्षेत्र में तो आदिकाल से सर्वश्रेष्ठ था अलग बात है कि हम अपनी छवि को सुरक्षित नहीं रख पाए पर एक बार फिर खुद को साबित कर रहे हैं। दुनिया अपना आरोग्य योग में खोज रही है यह भारतीय प्रतिभा का ही कमाल है जो सुप्त पड़ चुकी कला को पुनर्जीवित किया और विश्व में प्रचारित और प्रसारित किया।
न्याय क्षेत्र में हमारे अधिवक्ता और विधिवेत्ताओं की प्रसिद्धि दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। जिस कानून की पढ़ाई के लिए पहले भारतीय विदेश जाते थे आज विदेशियों को क़ानून पढ़ने के लिए भारत आना पड़ रहा है यह भारतियों के बौद्धिक क्षमता का करिश्मा है।
कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं जहाँ हिन्दुस्तानियों के कदम मज़बूती से टिके न हों।
हम तेज़ी से महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर हैं। हमारी जलसेना, थलसेना और वायुसेना आज विश्व के सबसे सशक्त सेनाओं में से एक है।
हमारे स्वतंत्रा सेनानियों के सपनों का भारत आज अस्तित्व में हैं। कमियां तो हर देश में हैं, कोई परिपूर्ण राष्ट्र कैसे बन सकता है? गर्व है की हमारा देश अनंत विडम्बनाओं के बावजूद भी प्रगति का पर्याय प्रतीत हो रहा है। कुछ कमियां दूर करनी हैं पर ये दायित्व तो हम भारतियों का है जिसे मिलकर,एकजुट होकर सुधारना है। हमें अपने देश को विश्वगुरु बनाना है, पूर्वजों के सपनों के साकार करने का समय आ गया है चलो मिल कर बनाते हैं अपने देश को सबसे बेहतर, ले चलते हैं सबसे आगे अपने देश को जिससे पूरे विश्व का सामूहिक स्वर हो-
“सारे जहाँ से अच्छा
हिंदुस्ताँ हमारा।”
चलो बढ़ाते हैं एक कदम हमारे सपनों के भारत की ओर ”हम सबके सपनों के भारत की ओर।”



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
November 29, 2014

श्री अभिषेख जी सुंदर लेख भारतीय बेहद मेहनती लोग हैं जहाँ भी जाते हैं अपनी पहचान छोड़ते हैं डॉ शोभा

sadguruji के द्वारा
November 29, 2014

विचारणीय रचना ! बहुत बहुत बधाई !


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