वंदे मातरम्

''न मैं कवी हूँ न कवितायें , मुझे अब रास आती हैं , मैं इनसे दूर जाता हूँ , ये मेरे पास आती हैं, हज़ारों चाहने वाले, खड़े हैं इनकी राहों में, मगर कुछ ख़ास मुझमें है , ये मेरे साथ आती हैं।''

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पप्पू पढ़ ले

Posted On: 28 Jan, 2013 मेट्रो लाइफ में

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बेटा पप्पू आज कल तू पढ़ नहीं रहा है. जानता है जिंदगी में पढ़ाई और लुगाई बार – बार नहीं मिलती. अब तू पढ़ेगा नहीं तो क्या करेगा? राहुल गाँधी तो है नहीं तू की तेरी शादी हो जाएगी? और होता भी तो क्या कर लेता? देख ले अपने राहुल भैया को ही देख ले, बेचारे की माँ पूरा भारत लूट रही है, पैसो की कोई कमी नहीं है, फिर भी बेचारा शादी नहीं कर रहा है, सोच जब वो पूरा देश लूट कर भी एक लुगाई नहीं रख सकता तो तू ठेला खीच के क्या कर लेगा?
अब हर जगह घूस -घास देना पड़ता है सरकारी नौकरी के लिए क्योंकि हर जगह अन्ना और केजरीवाल तो बैठे नहीं होंगे. इमानदारी का ढोंग रचने वाले सभी लोग एक नंबर के घूस ख़ोर हैं ऐसे में सूच तुझ निठाले को कौन नौकरी देगा? ये सर्कार जब चूल्हे चौके पे टैक्स लगा दे रही है तो ठेले पे भी टैक्स लगा देगी , सोचा है कभी? निक्कमा मत बन पढ़ ले .
कुछ दिन पहले तक तो तू फौज में जाने वाला था क्या हुआ? तू सर नहीं कटवाएगा? हवा पानी निकल गयी? दो सर कटे की मैदान छोड़ भाग लिया, अरे सरकार में दम नहीं तो क्या हुआ तू खुद में दम तो रख ले. देख दम का ही नतीजा है की चाची(सोनिया गाँधी) विदेशी होकर भी महारानी बन बैठी है. तेरे हिस्से का धन भी हड़प लिया है. बोल पप्पू तू क्या करेगा? कोतवाली से लेकर दिल्ली वाली भी तेरे चाची की है.शिकायत करेगा तो कटेगा .
देख रंगे हाथ पकडे जाने पर भी तेरे चाची का दामाद बच निकला, हाँ मगर तू सावधान रहना तू अगर अरविन्द की तरह भी काम करेगा तो जूते खायेगा क्या है न की तेरी पहुच नहीं है वहां तक . चल बेटा फौज में ही चला जा तेरा सायद भला हो जाए , मैंने सुना है वहां घूस नहीं लगता .
अरे तुझे याद है न पिछले साल जब तू पास हुआ था तो सरकार ने तुझे लैपटॉप देने का वायदा किया था पर एक बार भी तुझसे ये नहीं पुछा की बेटा चार्ज कैसे करेगा ? तेरे गाँव में बिजली तो साल में एक बार ही आती है, बिल तो हर हफ्ते आता है .
अपनी गरीबी से कुछ तो सीख, मेहनत से पढ़ तो ले क्या पता कोई प्राइवेट स्कूल में मास्टर हो जाए, वजीफा तो मिलने से रहा . याद है बेचारा निखिल ४० दिन से तहसील और ऑफिस के चक्कर लगा -लगा के थक गया पर अब तक उसका कुछ नहीं हुआ १००० रूपये तो फूंक चूका पर सरकार की तरफ से फूटी कौड़ी ना मिली. पढ़ ले जब तक तेरे बापू के पैरों में जान है, आखिर तेरे बापू कब तक रिक्शा चलाएंगे?
बेटा सच कहु तो कभी कभी मेरा मन करता है तेरी चाची के बाल उख्हद लूँ, पर इतने गार्ड है उनके पास की हम जैसों को पास भी नहीं फटकने देते हैं.
देख ले अपनी चाची को, तेरा माल तुझी से हड़प के राजरानी बन के बैठी हैं , अब तू पढ़ेगा या मरेगा. बेटा तू भारत का भविष्य है, तू कमजोर न पड़ना नहीं तो तेरे देश को विदेशी हड़प जायेंगे, मेरी चिंता छोड़ दे मैं जी लुंगी पर तुझे आने वाली पीढ़ियों की सपथ है तू देश के लिए जन्मा है, देश के लिए मर. मैंने तेरे चाची की तरह नामर्द बेटा नहीं मर्द बेटा किया है, तू जा सीमा पर , मान भारती तुझे पुकार रही है. तेरे साथ लाखों लोग है, तेरे मरने से अगर उनकी जिनगी बचती है, तो तू मर जा .
राष्ट्रकवि जी ने कहा है-
” जिनको न निज गौरव तथा निज देश पर अभिमान है,
वह नर नहीं नरपशु निरा है, और मृतक सामान है.”
कितनी भी विषमताएं क्यों न हों भारत देश महान है, हम अपनी संस्कृति के रक्षार्थ अडिग हैं, किसी भी देश्द्रूहो को जीने का अधिकार नहीं देंगे, पापु अब तू जाग जा, तुझे देश बदलना है.



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